योग का शाब्दिक अर्थ है जोड़ना अर्थात किसी में कुछ और का जुड़ जाना याने बढ़ जाना..
ये हमारे भारत देश की बहुत प्राचीन संस्कृति है। हमारे ऋषि मुनियों द्वारा दी गई अमूल्य धरोहर है। इसे करने से हमारा कभी कुछ घटता नहीं है। हमेशा बढ़ता ही है।
व्यायाम की अनेकों विधाएं हैं पर प्रत्येक में कुछ ना कुछ खर्च होता है और घटता ही है। पर हमारा भारतीय योग ही एकमात्र ऐसा है जिसमें हमारी ऊर्जा, हमारी उम्र, हमारा हौसला, हमारी मानसिक, शारीरिक, आंतरिक और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती ही जाती है।
सबसे बड़ी बात हम योग करके कभी भी थकान महसूस नहीं करते बल्कि एक सकारात्मक ऊर्जा अपने भीतर संचित महसूस करते हैं। यही है योग साधना का महत्व। जिसे आज सारी दुनिया मान चुकी है और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में स्वीकृति दी है।
आसन और प्राणायाम हमारे शरीर के विभिन्न भागों को खींचते, मरोड़ते और हिलाते-डुलाते अवश्य हैं पर हमें थकान की अनुभूति कभी नहीं हो पाती क्योंकि प्राणायाम के द्वारा हम अपनी उर्जा शक्ति व पूर्वावस्था को पुनः प्राप्त कर लेते हैं।
यही है योग का महत्व जो मानव जीवन के लिए वरदान है। बस समझना, करना और अपने दैनिक जीवन में उतारना जरूरी है। इसलिए कहा गया है कि..
जो योग कर पाया..
वो पा गया निरोगी काया..
-सुषमा अग्रवाल
नागपुर (महाराष्ट्र)
