पिता

पिता एक समूचा आसमान !
जहाँ विचरते हैं
सपनों के जगमग सितारे,
होती महत्वाकाक्षाओं की ऊँची उड़ानें
और असीम को मुठ्ठी में भर लेने का अटूट हौसला !

एक मजबूत वटवृक्ष!!
जहाँ मिलता है
स्नेह और विश्वास भरा
शीतल छाँव,
हर सुख की खान
जिसकी मजबूत बाँहों में
झूलता है मासूम बचपन
बनाता घरौदे सपनों के
और जिसके पात-पात में रखता है नन्हे कदम,!!

और पाते हैं अनुपम सुख शांति वात्सल्यमय मंजिल
जिसकी पनाह में सारा जीवन निरद्वंद हो जाता है।

पिता एक ऐसी किताब !!
जिसे कभी पूरा नहीं पढ़ा गया अपठित पन्ना बनाते रहे सदैव, एक रहस्यमय व्यक्तित्व!
अबूझ पात्र जीवन का महानायक जिसका प्रारंभ और अंत उसी पर होता है!

पिता विश्वास का संबल
आस्था का प्रतीक
निष्ठा का रूप !
कर्मवीर, कर्मपथी, है महारथी पिता परिवार का सारथी!!

सुदृढ मुस्कानों से झेलता
झंझा जीवन का
बचाए रखता सुरक्षित,
संतति और परिवार की गरिमा होता है आस्थाओं मर्यादाओं की मजबूत कपाट!!

पिता एक एहसास
अटूट प्यास
मुकम्मल तलाश!
तिमिर पथों पर पुंज उजास,
सृष्टिकर्ता पालनकर्ता
दुखहर्ता सुखकर्ता!

पिता माथे की धूलि चंदन आत्माओं का बंधन
विराट का संवर्धन!
नम्र नमित नमन
विनय विराटता विहंगम वंदित
वंदन!

पिता-सूत्र सुक्ति,
युक्त युक्ति,
मोह मुक्ति,
बूंद विराट सम्यक ललाट सत्य प्रकाश!!

-सुधा शर्मा
राजिम (छत्तीसगढ)

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