पिता है ऊंचे आकाश जैसा
उम्मीदों का फैला आसमान
जब जरूरत जीवन सा जल
बरसाता खुशियों के मेघ बन
पिता है साहस फैला वृक्ष सा
हर और हरियाली हिम्मत दृढ़
जब जरूरत जीवन को फल
देता अमृत स्वाद मिठास बन
पिता पालक ज्ञान सागर सा
अखिल ब्रह्मांड है गागर भर
जब जरूरत संघर्ष त्याग सब
मिटाता अंधेरा जले दीप बन।
-संदीप नेमा दीप
भोपाल
