होना नहीं निराश,देख मन स्वयं बदलना।
उम्मीदों के साथ, बढ़ो नित आगे चलना।।
भले न कुछ हो शेष, उम्मीद है तो जीवन।
जाती रजनी बीत,भोर नव खिलते उपवन।।
धुंध-धुआँ पथ बाध्य, तोड़ कंटक की राहें।
परिवर्तित हों मोड़, पूर्ण हो जाती चाहें।।
समय-समय की बात, नाव चलती रुक जाती।
कर्म भरोसा ईश, बाँचता सबकी पाती।।
आशाओं के शैल, श्रृंग से निर्भीक होते।
होते अडिग हिमांशु वीरता कभी न खोते।।
मन-मंदिर सुखधाम, तीर्थ शुभ जीवन मंगल।
किला बनो चट्टान, दर्श तुझमें वारंगल।।
-अमिता रवि दुबे
छत्तीसगढ़
