किस तरह गुज़री मेरी मत ज़िंदगानी देखिए
आप तो मेरी फ़क़त आँखों का पानी देखिए
देखिए मत किस तरह आई पहाड़ों से उतर
आप तो बहती नदी की बस रवानी देखिए
तालियां मत पीटिये शायर के ज़ख़्मी शेर पर
ज़ख़्म ए दिल की खूबसूरत तर्जुमानी देखिए
चाँद, तारे, कहकशाँ ये तो फ़क़त तमसील हैं
देखना है तो तख़य्यूल का मआनी देखिए
वक़्त की रफ़्तार में ढलती है कैसे ज़िन्दगी
आइने में दिन ब दिन ढलती जवानी देखिए
प्रश्न जितने हैं सभी मिसरा ए ऊला में पढ़ें
और उत्तर के लिए मिसरा ए सानी देखिए
मुब्तला गर दर्द ओ ग़म से आप हैं मदहोश के
तो कभी मदहोश की ग़ज़लें पुरानी देखिए
-अजय श्रीवास्तव ‘मदहोश’
