जब कभी मुझे समझना चाहो
मेरे शब्दों का इंतजार मत करना
पढ़ लेना
मेरी आंखों को
मेरी मुस्कान को
और मेरी बेचैनी भी
समझ लेना
मेरी शिकायतें
मेरा मौन
और आंखों की नमी भी
सुन लेना
मेरे गीतों की गुनगुन
मेरी पायल की छन छन
और कंगन की खन खन भी
आत्मसात करना
मेरी ऊर्जा
मेरा अधिकार जताना
और मेरा रूठना भी……….
-अनुपमा शर्मा
रुड़की
