मौन रहकर मेरे मौन की भाषा पढ़कर देखो।
नैनों से मेरे नैनों के संवादों को गढ़कर देखो।
प्रेम, विश्वास से संबंधों की डोर अटूट बनी है ,
सुनो सांसों के तारों को, सांसों में भरकर देखो।
हरदम भावनाएं शब्दों की मोहताज नहीं होती,
तुम से कितना जुड़ाव है ह्रदय से लगकर देखो।
सारे दुख, चिंता, बेचैनी दूर हो जाएगी हमारी,
अपने हाथों में मेरे हाथों को बस धरकर देखो।
हरेक पल हमें कुछ न कुछ सिखाता जरूर है,
अपने सपनों के फूलों में खार भी चुनकर देखो।
-डॉ अमृता शुक्ला
