बहुत कुछ कर सकते हो ये तो जानों,
अरे नौजवानों अपनी ताकत को पहचानो।
जिनके हाथों में देश की बागडोर है,
तुम्हारे हाथों में उनकी किस्मत की डोर है।
वो जो सिंहासन पर विराजमान है,
उन पर तुम्हारा ही तो ये एहसान है।
जुल्म करके अगर वो खामोश हैं,
इसके पीछे बस तुम्हारा ही दोष है।
सब कुछ देख कर न अंधे बनों,
अपनें कानों पे यूं न उंगली धरो।
लम्बे समय तक न इन्हें आजमाओ,
अरे नौजवानों अब तो होश में आऔ।
गिर कर सम्भलनें की कोशिश करो,
सब कुछ बदलनें की कोशिश करो।
गर न सम्भले तो उनका न कुछ जाएगा,
देश फिर से गुलाम हो जाएगा।
देश उनका ही नहीं तुम्हारा भी है,
कुछ करने का हक तुम्हारा भी है।
किसी की मदद के न मोहताज हो,
अरे तुम तो दुनिया में सरताज हो।
देश सोने की चिड़िया था यह तो जानो,
यह अब भी वही है इस सच को मानो।
अभी वक्त है कुछ न देरी करो,
धर्म के नाम पर न झगड़े करो।
प्रांतवाद के चक्कर में भी न पड़ो,
जातपात के ओछेपन से दूर रहो।
उठे आंख तुम पर उसे फोड़ दो,
जो बांटे तुमको वो कर तोड़ दो।
देश है सर्वोपरि ये उनको भी समझाओ,
गर न माने वो तो संसद से बाहर करो।
उनकी मर्जी अब तक है चलती रही,
अब अपनी चलाने की बस हिम्मत करो।
बहुत कुछ कर सकते हो यह भी मानों,
अरे नौजवानों अपनीं ताकत को भी पहचानों।।।।।
-राकेश नमित
