हिमालय में महिलाएँ पानी का इस तरह से इंतजाम कर रही हैं ताकि झरने रिचार्ज हो सकें
हिमालय में करीब 30 लाख झरने हैं। भारत सरकार की 2017 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक हिमालय के आधे से ज्यादा झरने या तो सूख चुके हैं या वे बरसाती झरने रह गए हैं। इन झरनों को बचाने का बीड़ा उत्तराखंड और हिमाचल की महिलाओं ने उठाया है।
पानी के लिए महिलाओं को ही परेशान होना पड़ता है। घर के कामों के लिए पानी की बहुत जरूरत होती है। पानी नहीं होगा तो खाना कैसे बनेगा? बर्तन कैसे साफ होंगे? और यह सब काम महिलाओं को ही करना पड़ता है इसीलिए महिलाओं ने मिलकर यह पहल की।उन्होंने इसके लिए कई जल कमेटियाँ बनाई हैं। सब साथ मिलकर हिमालय के पानी का कुछ हिस्सा पहाड़ों में रोकने की कोशिश कर रही हैं। वो उसके लिए जगह-जगह गड्ढे खोद रही हैं। पहाड़ों में बारिश और झरने तो बहते ही रहते हैं। गड्ढे खोदने से पहाड़ों से जो अपने आप ही बारिश और झरने बह कर आते हैं। उसका पानी गड्ढ़ों में भर जाएगा।उससे भूजल रिचार्ज हो जाएगा और यह झरने हमेशा सदाबहार बन सकेंगे।
पहाड़ों में झरनों को बचाना जरूरी है ताकि पीने के पानी की गारंटी रहे और औरतों ने इस काम को करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।उन्होंने सोच लिया है कि वे हार नहीं मानेंगीं। इस काम को सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुँचा कर ही दम लेंगी।
-राधा गोयल
दिल्ली
