चल भर लें उड़ान ऊँची,
बना लें आसमान में अपना डेरा।
किसी और की करें हम परवाह क्यों,
जब थाम लिया है हाथ तेरा।
अब राहों से डर कैसा,
जब साथ तेरा उजियारा है।
हर मुश्किल की काली रात में,
तू ही मेरा ध्रुवतारा है।
सपनों के पंखों को खोलें,
हौसलों की हवा संग बह जाए।
गिर भी जाएँ तो कोई ग़म नहीं,
विश्वास तेरा लिए फिर उठ जाए।
दुनिया चाहे लाख कहे कुछ,
हम अपने मन की सुन लें।
हर ठोकर को बनाकर सीढ़ी,
नई मंज़िल की ओर बढ़ें।
न धन का लोभ, न यश की चाह,
बस प्रेम रहे जीवन का सवेरा।
हर धड़कन में एक ही धुन हो
मैं तेरी और तू है मेरा।
चल भर लें हम उड़ान ऊँची,
क्षितिज से भी हो आगे बसेरा।
होगी जीवन की हर डगर सुहानी,
जब थाम लिया है हाथ तेरा।
-रीति झा
