बढ़ चले नई राह पर हम
हर कदम हो साथ तेरा
मंजिल भी मिल जाएगी
अब थाम लिया है जब हाथ तेरा।
ऊँची-नीची होगी डगर तो
तुम सहारा देकर संभालो
बहके जो गर कदम तुम्हारे
मुझको तुमभी आजमालो।
जन्म जन्मों तक निभाना
साथ अब हमको तुम्हारा
मझधार कश्ती भी फंसेगी
मिल ही जाएगा किनारा।
छूटे ना बंधन ये तब तक
सांस जब तक तन में है
रोम रोम पर नाम तेरा
आस जब तक मन में है।
बेफिक्र सी है जिन्दगी तुमसे
ऐ हमकदम मिलने के बाद
साथ एक दूजे में खोकर
दुनिया नई होगी आबाद।
छोड़कर तुम भी ना जाना
आओ लें हम-तुम कसम
थामकर अब हाथ दोनों
मिलते रहेंगे जनम जनम।
-किरण मोर
कटनी (म.प्र.)
