जब थाम लिया हाथ तेरा,
धड़कनें भी रुक सी गईं।
शोर था दुनिया का सारा,
एक पल में थम सी गईं।
रिमझिम सी बरसात थी,
भीगा भीगा सा जहान।
तेरी हथेली की गर्मी में,
मिल गया मुझे सुकून का मान।
राहें कांटों भरी थीं,
तूने फूल बना दीं।
अँधेरे से डर लगता था,
तेरी आँखों ने रोशनी कर दीं।
वादा नहीं किया तूने,
बस साथ निभाने की कसम खाई।
जब थाम लिया हाथ तेरा,
ज़िंदगी मुकम्मल हो पाई।
अब गिरूँ तो तू थाम ले,
बिखरूँ तो तू समेट ले।
ये हाथ जो थामा है तेरा,
आखिरी साँस तक न छोडू।
अवनी से अंबर तक
सिर्फ साथ चलूं तेरे।
गर्मी हो, सर्दी की रात
रिमझिम बारिश हो या।
बसांती बहार की बयार
हर पल गुजारे साथ तेरे।
-मंजू सरावगी मंजरी
रायपुर
