कारगिल

माँ की गोद में छुपा हुआ था, वो तो था इक माँ का दिल,
आन पड़ी तो माँ फिर बोली, जा बेटा तू कारगिल…

मिला संदेशा बहना का, आना भैया राखी पर,
इसी राखी की लाज को रखने, जा पहुँचा वो कारगिल…

पाती पाकर प्रियतमा की, मचल रहा था उसका दिल,
आया बुलावा मातृभूमि का, तो वो सीधे पहुँचा कारगिल…

किये सोलह सिंगार सजनिया, बाट देख रही साजन की,
भारत माँ का कर्ज चुकाने, साजन पहुँचा कारगिल…

किये न्योछावर हमने प्राण, बेटे, भाई, साजन के,
तब जाकर के हमने पाया, भारत का दिल कारगिल…

बहनों से बिछुड़े हैं भाई, सुहागिनों के मिट गये सुहाग,
तेरे इस वहशीपन से, बुझ गये कितने घरों के चिराग…
देख-देख कर शहीदों की चिताएँ, बुझती क्यों नहीं तेरे जिगर की आग…

अब तो होश में आ जा – अमन के दुश्मन,
क्यों उजाड़ने में लगा है – हमारा ये चमन,
होश लगा देंगे – ठिकाने में तेरे,
उठाते हैं आज, हम सब ये कसम,
ये वतन है हमारा और हम हैं वतन के,

खाते हैं आज…
हिंदुस्तान की कसम
हिंदुस्तान की कसम…

-सुषमा अग्रवाल
नागपुर (महाराष्ट्र)

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