विश्व चिंतन
आरक्षण को मारो गोली, निज रक्षण की बात करें हम।
विश्व तंत्र के सटीक जगह पर सीधा ही आघात करें हम।
दुनियाँ में हर रोज दिखाई देती है, कितनी बेरहमी।
भारत शांत प्रिय प्रदेश है, दिखा रहा इसलिए ये नर्मी।
अगर भड़क यह गया विश्व में, क्रांति की आवाज उठेगी।
जिसने जो ले लिया अभी तक, सूद सहित वापस वो देगी।
छोड़ो, घर की टूटी बातें, चलो, विश्व को राह दिखाने।
जो, पटरी से उतर चुकी है पुनः उसे, पटरी पर लाने।
वह देखो इरान है चोटिल, आग हृदय में धधक रही है।
वह देखो यूक्रेन पीठ को सहलाती कैसे कहर रही है।
क्यों ऐसा होता है, क्या है, हित पर क्यों आघात हो रहा।
छोटे – छोटे देश देख लो, पैर पड़ रहा, झार रो रहा।
बस इतने पर नहीं रुकेंगे, यह आवाज वहाँ तक भेजो।
रखो कविता सहज हृदय में और मुबाइल खोल, सहेजो।
बहुत हो चुका अब न होगी किसी को न, कटने दूंगा।
लड़ व झगड़ रहेंगे संग – संग, देश नहीं बटने दूंगा।
-टी के पाण्डेय
