अंकुर से वटवृक्ष

सिया के घर में तीन महीने से सन्नाटा ऐसे पसरा था, जैसे उजले आँगन में अचानक धूप का आना बंद हो गया हो। पति के जाने के बाद उसका मन बुझते दीये-सा टिमटिमाता रहता था— जगह तो वही थी, पर रोशनी कहीं खो गई थी।

एक शाम उसका मन हुआ कि पार्क जाकर कुछ देर बैठ आए पर समाज की निगाहें उसे काँटों-सी चुभती लगीं—“लोग क्या सोचेंगे…” यह सोच उसे दरवाज़े तक ले जाकर वापस लौटा लाई थी।

वह टीवी के सामने बैठ गई थी पर चैनलों की आवाज़ उसके भीतर की सूखी ज़मीन पर जैसे और गर्द जमा रही थी। तभी उसके मन में एक कोंपल-सी फूटी — छोटी, कोमल, पर जीवन से भरी— “क्यों न… अनपढ़ माता-पिता के बच्चों को पढ़ाया जाए?”

बस, यह विचार आया नहीं— मानो भीतर एक दीप जल उठा। सिया के कदम अचानक तेज हो गए, वह भागकर कॉपी और पेन ले आई— जैसे कोई माली पहली बारिश में बीज बोने को उतावला हो।

कहाँ बैठाना है, कैसे शुरू करना है— उसने सब कुछ पहले कागज़ पर उतार, घरेलू सहायिका से अपनी इच्छा साझा की और फिर सहायिका की मदद से इंतजाम कर लिया।

सहायिका की मदद से चार बच्चे अगले ही दिन आ गए— छोटे-छोटे, मासूम चेहरे जैसे सूनी ज़मीन पर पहली हरियाली उग आई हो। उनकी किलकारियाँ और सवाल सिया के सूने मन में रंग भरने लगे— जैसे किसी ने बंद कमरे की खिड़की खोल दी हो। धीरे-धीरे चार से आठ, आठ से बारह और आज… अठारह बच्चे उसके आँगन में ज्ञान के दीप जला रहे हैं।

सिया अब केवल पढ़ाती नहीं, वह बच्चों को व्यायाम करना, स्वस्थ रहना भी सिखाती है— और जब बच्चे कक्षा 6-7 में पहुँचते हैं, उन्हें कहती है— “अब अपने पंखों से उड़ो, कोई दिक्कत हो तो आकर पूछना…”

फिर वह नए बच्चों को थाम लेती है— जैसे एक नदी अपने जल को आगे बढ़ाकर नई प्यास बुझाने को फिर लौट आती हो।

आज सिया का घर फिर से जीवंत है— जहाँ पहले सन्नाटा था, वहाँ अब शब्दों की चहचहाहट है। वह समझ चुकी है— जीवन कभी रुकता नहीं, बस रूप बदलता है।

उसके भीतर की कोंपल अब वटवृक्ष बन चुकी है— जो खुद धूप में खड़ी होकर दूसरों को छाया दे रही है और समाज… जिसकी चर्चाओं से वह कभी डरती थी, आज उसी समाज में सिया एक मिसाल बन चुकी है।

-नील मणि

एक उत्तर छोड़ें

अन्तरा शब्दशक्ति – हिन्दी साहित्य, प्रकाशन और रचनाकारों के सशक्तिकरण का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच।
संपर्क करें
antrashabdshakti @gmail.com
Call- 9009423393
WhatsApp-9009465259
antrashabtshakti.com

Copyright © 2026 Antra Shabd Shakti. All Rights Reserved. Powered by WebCoodee