मन मस्तिष्क की तोड़ दीवारें,
आगे बढ़ना ही होगा,
जीवन है कांटों की बगिया,
बच के चलना ही होगा।।
इस संसार सागर को,
पार तो करना होगा,
जीवन की धूप छांव में,
सबको तपना ही होगा।।
जय पराजय की दुविधा को,
दूर करना ही होगा,
बुरा-भला सहनकर प्यारे,
आगे बढ़ना ही होगा।।
संसार एक जाल है प्यारे,
हरदम फँसना ही होगा,
इस मकड़जाल को काट के,
आगे बढ़ना ही होगा।।
*टूटते सपने हैँ रोज,
फिर भी जीना ही होगा,
अपनी जिम्मेदारी को,
पूरा करना ही होगा।।
रोज होंगी नई चुनौतियाँ,
सामना करना ही होगा,
नए समाधान भी तुझको,
संग खोजना ही होगा।।
बोझ समझ या जिम्मेदारी,
त्याग करना ही होगा,
तोड़ के सारे बंधन तुझको,
आगे बढ़ना ही होगा।।
-साधना छिरोल्या
दमोह (मध्य प्रदेश)
