ऑपरेशन सिंदूर

देशप्रेम और मनोदशा 

अभी उड़ा स्टेडियम, देखो बेटा पाक।
जल्द देखते देखते, हो जाओगे खाक।।

आई देखो पाक की, शामत आज बतौर।
रावलपिंडी लाल है, काँप रहा लाहौर।।

सिस्टम सभी डिफेंस के, हो जाएंगे नष्ट।
एयर वाला था प्रथम, कहते हैं स्पष्ट।।

ऐसे ही चलते रहो, सतत सुदर्शन चक्र।
पूरा भारत कर रहा, तुम पर अतिशय फ़क्र।।

अब हम कर सकते नहीं, हरगिज़ तुझको माफ।
कर देंगे अब तो तुझे, नक्शे से ही साफ।।

बार-बार समझा रहे, मगर कर रहा भूल।
लगता तुझको मच रही, मर जाने की चूल।।

वार कर रहा नक्कटा, भर भर कर अंगार।
सचमुच अबकी बार तो, ठठरी देंगे बार।।

सेना को आशीष दो, ऐसा अब गोविंद।
कंबल में हो पाक अरु, मंगल में हो हिंद।।

युद्ध भयंकर चल रहा, भारत है बेबाक।
गर्दिश में तारे सहित, ग़फ़लत में है पाक।

घेर लिया हमने उसे, धुँआ धुआँ है पाक।
बेशक अब तो शीघ्र ही, रगड़ेगा यह नाक।।

सैनिक सेवा दे रहे, महाकाल मानिंद।
गूँज उठेगा शीघ्र ही, जय जय जय जय हिंद।।

स्वयं ट्रंप समझा रहा, मगर गले का ढोल।
बात समझता ही नहीं, घूम रहा है गोल।।

वतन परस्ती का अगर, करवा देता कोर्स।
नहीं काँपती इसकदर, पाकू तेरी फोर्स।।

भारत-पाकू युद्ध में, देख हमारा ताब।
पेशावर को लग गया, अभी-अभी पेशाब।।

दिखा दिए तारे मगर, उसे चाहिए मून।
सिद्ध हुआ इस तथ्य से, पाकू; अफलातून।।

कईं पाक के पायलट, लगा रहे यूँ दाग।
उनको लेना भाग था, मगर रहे वह भाग।।

भारत का हर वार यह, करा रहा संज्ञान।
बिटुआ मैं ही हूँ तेरा, असली अब्बूजान।।

एक एक करके सभी, शहर रहे हम भून।
गीली सह पीली हुई, पाकू की पतलून।।

सैनिक खुद से कह रहा, साज-बाज सह गाज।
सभी ठिकाने ठीक से, लगा ठिकाने आज।

नहीं रुकेंगे हिंद के, सैनिक हैं पुरजोर।
तीनों सेना कह रही, ये दिल माँगे मोर।।

समझाया इसको बहुत, हमने कल की शाम।
लेकिन यह आतुर रहा, जाने को सुरधाम।।

-चिराग़ जैन ‘चैतन्य’
भरूच (गुजरात)

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