बीते कल की धूल उठाती,
स्मृतियों के दीप जलाती,
पीड़ा को भी गीत बनाती,
अश्रु में भी अर्थ सजाती—
कविता हर स्मृति लिखाती…
आज के क्षण को थामे रखती,
प्रासंगिकता नित स्वर में कहती,
जनमन की भाषा बन बहती,
सत्य की राह सदा दिखाती—
कविता हर सत्य लिखाती…
आने वाले स्वप्न सँवारती,
उम्मीदों के रंग निखारती,
नव सृजन की ज्योति उतारती,
मानवता का गीत संवारती—
कविता हर सपन लिखाती…
-दिलीप आचार्य “सोमेश्वर”
बांसवाड़ा (राजस्थान)
