कुशल, कौशल और कुशलता

दोनों समानार्थी होकर भी व्याकरण की दृष्टि से दोनों में ही अंतर है । कुशल एक विशेषण है जो किसी विशेष कार्य में व्यक्ति दक्षता की ओर इंगित करता है अर्थात किसी कार्य को करने की दक्षता बतलाता है।
दूसरी ओर कौशल संज्ञा है अर्थात उस विशेषता को धारण करने वाला व्यक्ति जिसके पास वह कौशल है। यहां पर कौशल संज्ञा है।
अंत में कुशलता कुशल होने की अवस्था भाव वाचक संज्ञा है है । किसी भी कार्य को करने का कौशल ही उस कार्य को करने की दक्षता का प्रमाण ही उसके कार्य को करने का भाव है जो उसकी अवस्था बतलाता है। कौशल को सीखने वाला व्यक्ति है जब कि कुशलता प उस कार्य को करने की अवस्था है। एक प्रकार से किसी भी कार्य को कम समय में सही ढंग से करने पर हमें जो परिणाम मिलता है उसे ही कार्य की कुशलता कहते हैं। इस तरह से हम देखते हैं कि किसी भी व्यक्ति को कार्य को कुशलता पूर्वक करने के लिये उस कार्य को करने की दक्षता का कौशल उसके पास होना चाहिये।कौशल के लिये कुशल बनना आवश्यक है । व्यक्ति अपने कार्य करने मे कुशल अर्थात दक्ष तभी हो सकता है जब उसने उस विषय के लिये ज्ञान प्राप्त किया हो। विषय ज्ञान प्राप्त करने करने के लिये अध्ययन आवश्यक है जब आप उस विषय से संबंधित पुस्तकों को नही पढ़ेंगे किसी कुशल गुरु से
उसकी शिक्षा प्राप्त नही करेंगे तब तक बुद्धि का विकास नही होगा । बुद्धिमान व्यक्ति ही किसी भी कार्य को करने की दक्षता प्राप्त कर सकता है। इसीलिए किसी भी विषय अथवा कार्य को कुशलता पूर्वक करने के लिये उस कार्य को करने का कौशल होना चाहिये।कौशल बिना दक्षता के नहीं आता दक्षता के लिये उस कार्य में दक्ष होना आवश्यक है।
अपने कार्य में कुशल होने पर ही व्यक्ति के अंदर अपनेआत्म विश्वास की भावना जागृत होती है।आत्म विश्वास बढ़ने पर व्ह कुशलता पूर्वक अपने कार्य की क्षमता को बढ़ा कर अपने क्षेत्र का कुशल विशेषज्ञ बन जाता है यही कौशल ही उसके लिये उसके कार्य की कुशलता का प्रमाणपत्र है। कोई व्यक्ति एक ही दिन में कुशल नहीं बनता इसके लिये धैर्य पूर्वक एकाग्र चित्त होकर सीखना पड़ता है।
तभी वह उस ज्ञान को प्राप्त कर पाता है। कार्य कुशल होने की साधना में वर्षों लग जाते हैं तब कहीं जाकर व्यक्ति उसे सीख पाता है सीखने के बाद ही जब वह स्वयं उस कार्य को करने लगता है तभी उसमे कार्य को करने का कौशल आता है जो उसे कुशलता की ओर ले जाता है । इस तरह से तीनों का ही एक दूसरे के साथ आपस में अंतरंग संबंध है । कुशल यद विशेषण है तो कौशल उसकी संज्ञा है‌ जब की कुशलता उसकी भाववाचक अवस्था है।

-ऊषा सक्सेना
मुंबई

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