मेरा देश मेरा शहर भी,
चीख रहा है,
बिलबोर्ड, ट्रेंड, ट्रोल, ट्रैफिक
और मैं,
बीच चौराहे पर,
मौन की चादर ओढ़े,
खड़ा हूँ।
बोलना चाहता हूँ,
पर हर लफ्ज़ के आगे,
डर का पहरा है,
सत्ता का ताला है,
अपनों का भी डर है,
तो चुप रह जाता हूँ।
चुप्पी में वो ताकत है,
जो हजार भाषण,
नहीं कर पाते,
चुप्पी में वो गवाही है,
जो गवाही नहीं दे पाते,
देखा है मैंने,
मौन रहते हुए भी उनकी,
आँखें सच बोल देती हैं,
खामोश होंठों पर भी,
सवाल चिपक जाते हैं,
ये दुनिया शोर की है,
पर फैसला,
अक्सर खामोशी ही,
करती है।
जिस दिन सब चुप हो जाएँगे,
उस दिन सच,
सबसे ऊँचा,
बोलेगा।
-आनंद पाण्डेय “केवल”
