गुलमोहर नाम हमारा
खडा हूंँ मै बाट निहारे
कई पथिक आते पास हमारे
लेट जाते मेरे सिरहाने
खडा हूँ मै दोनों हाथ पसारे
नयन बिछाये आभा बिखेरे
रक्तवर्ण की चूनर ओढे
स्वागत मे हूँ पग तुम्हारे
लालिमा लिये फूल हमारे
धधकते अंगारे ज्यों हमारे
तपती गर्मी लू लपट मे
खडा हूँ मै सीना ताने
भीषण गर्मी नौ तपा में
अडिग खडा हूं पगडी बांधे
चहूं ओर आंधी पतझड में
पीड़ा सहकर डटा हुआ हूं
शीतल सुगंध ठंडी छाया देता
नैनों को सुख भी देता
परोपकार मै तत्पर रहता
बदले मे कुछ न लेता
आओ बैठो शीतल छाँव मे
थकान उतारो मेरी बाँह में
औषधी से भरपूर हूँ मै
गुणों से भरपूर हूंँ मै
गुलमोहर नाम है हमारा
-अर्चना कटारे
