“गौरैया की प्यास”
कोई एक कटोरा रख दो
थोड़ा सा जल उसमें भर दो
भरी दोपहर गौरैया आए
चोंच डुबा कर प्यास बुझाए
गौरैया धरती की बेटी
सूखे ताल तलैया टोंटी
दूर-दूर तक पेड़ नहीं है
नन्हीं कहो कहाँ सुस्ताये
पास उगा दें एक क्यारी
छोटी मोटी कुछ फुलवारी
एकदम खुले में जल न रखें
कि गरम हो जल विषाक्त हो जाए ॥
-ख़ुशी प्रयागराज
