छाईं खुशियां

कारे बदरा देख-देख कर,
आंखों में उम्मीद हैं आईं।

बारिश की फुहार को पाकर,
प्यासी धरती है हरषाई।

बच्चों की टोली ने मिलकर,
जहां-तहां है दौड़ लगाई।

शीतल सुरभित पवन बह रही,
जनमानस में उमंग है छाई।

मेंढक ने आनंदित होकर,
टर्र-टर्र आवाज लगाई।

रस फुहार जो हो रही है,
पेड़ो पर हरियाली छाई।

होने लगी बरसात अंबर से,
डाल-डाल संग प्रकृति मुस्कुराई।

कागज की वह नाव बच्चों की,
जहां-तहां बन रही हैं भाई।

कृषक वो मिलकर गीत गा रहे,
सारी धरा पर खुशियां छाईं।

-सीता गुप्ता
दुर्ग (छत्तीसगढ़)

एक उत्तर छोड़ें

अन्तरा शब्दशक्ति – हिन्दी साहित्य, प्रकाशन और रचनाकारों के सशक्तिकरण का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच।
संपर्क करें
antrashabdshakti @gmail.com
Call- 9009423393
WhatsApp-9009465259
antrashabtshakti.com

Copyright © 2026 Antra Shabd Shakti. All Rights Reserved. Powered by WebCoodee

0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x