है रफ्तार कम तो क्या हुआ,
जिन्दगी हुई,
थोड़ी बेहाल तो फिर क्या हुआ,
बिगड़ गए हैं जो हालात,
तो फिर क्या हुआ,
ज़रा से खौफनाक हुए हैं मंज़र,
तो क्या हुआ,
मौकापरस्त हो गए चंद लोग,
तो फिर क्या हुआ।
ख्वाब हैं,
ख़्वाहिशें हैं,
धड़कने हैं,
तो रास्ते खुदबखुद बना लेंगे हम।
मौत से डरते नहीं लेकिन,
आने देंगे नहीं अभी,
क्योंकि,
कुछ पाना बाकी है,
कुछ करना बाकी है,
आने वाले कल के लिए,
इतिहास बनाना बाकी है।
हौंसलों की उड़ान,
बन के तूफान,
पार कर लेगी,
सारे इम्तहान।
जिन्दगी थोड़ा सा सब्र कर,
रफ्ता-रफ्ता ही सही ,
पा लेने दे वो मुकाम,
जो पाना बाकी है ।
पा लेने दे वो मुकाम,
जो पाना बाकी है ।
-पिंकी परूथी “अनामिका “
