तन से बुजुर्ग, मन से युवा

अत्यधिक मनोबल वाले हमारे बुजुर्ग,
तन से बुजुर्ग, मन से युवा,
हमसे भी ज्यादा कार्य कुशलता,
नियमित जल्दी उठना योग साधना करना,
पूजा पाठ कर संयमित जीवन जीना,
सुख दुख में समभाव रहना,
यही हमारे बुजुर्गों का गहना,
दिखते हैं हमको बड़े कड़क,
लेकिन मन से होते हैं बड़े नरम,
बच्चों के संग बच्चे बन जाते,
बड़े प्यार से खेल खिलाते,
जाग जाता उनका भी बचपन,
लगता नहीं उनकी उम्र है पचपन,
मित्र मंडली जब संग में होती,
जाने क्या-क्या शरारतें होती,
देखकर कह नहीं सकते बुजुर्ग,
क्योंकि तन से बुजुर्ग मन से युवा,
बड़े ही मेहनती हमारे बूढ़े युवा,
रहते है उन्नति की ओर अग्रसर,
जब भी आए हमें कोई मुश्किल,
मिल जाता उनके अनुभवों से हल,
हो जाती मिनटों में मुश्किल आसान,
बड़े बुजुर्ग ही हमारे जीवन का आधार,
हमेशा करो उनका सम्मान,
उनसे पाओ अनुभवों का ज्ञान,
उनके आशीर्वाद से ही पाया संसार,
बड़े बुजुर्गों के बिना जीवन निराधार।

-नीतू रवि गर्ग “कमलिनी”
चरथावल, मुजफ्फरनगर (उत्तरप्रदेश)

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