इतना मुश्किल भी नहीं अब
तुम्हारे बिना जी पाना
तुम्हारे जाने के बाद मैंने
प्रेम को और निकट से जाना
कॉफी का स्वाद वैसा ही है
जैसा तुम्हारे साथ पीने में आता था
डार्क चॉकलेट अभी भी कसैली ही है
रात को उठकर अब भी
टीबैग वाली चाय बनाती हूँ
गर्म पानी की कैटल वैसा ही शोर करती है
जैसा तुम्हारे आगे करती थी
और हाँ आज भी मेरा
सुबह का पहला भोजन
इडली सांभर ही होता है
कांच की खिड़की से बाहर की दुनिया
ठीक वैसी ही दिखाई देती है
जैसी तुम्हारे साथ देखने पर दिखाई देती थी
अनजान सड़कों पर आज भी
पैदल निकल पड़ती हूँ
ये बात अलग है कि
अब कोई हाथ पकड़कर
फुटपाथ पर नहीं खींच लेता
स्वीमिंग पूल के किनारे आज भी
वैसी ही गूढ़ आवाज़ करते हैं
चुपचाप सुनती हूँ आज भी
पानी की हलचल को
रूम का ए सी अब कुछ देर को
बंद भी कर लेती हूँ
रूम ठंडा ही रहता है
टी वी आज भी नही खोलती
किताबें मेरे सिरहाने ही रखी होती हैं
लेपटॉप को मैं लेप्पी कहना पसंद नहीं करती
वो तो तुम्हारा अंदाज़ था
मैं तुम्हारे हर अंदाज़ और
बात से बाहर आ गयी हूँ
मैं तुमको अब याद नहीं करती
हां बस रात को सोते वक़्त अचानक
किसी खटके पर जाग जाती हूँ
पहले जैसी निश्चित होकर
सो नहीं पाती हूँ
वैसे तो सब ठीक है
तुम्हारे जाने के बाद
बस , गहरी नींद नहीं आती
एक तो तुम्हारे कंधों पर
बाल बिखराकर
सोने की बुरी आदत थी
और दूसरा अब
अकेले सोने में आहटें डराती हैं
तुम्हारे जाने के बाद
इतना मुश्किल भी नहीं है जागना
पर सोना आज भी आसान नहीं है
-निधि नित्या
