थकान…
उसी समय मिट चुकी थी
जब उसने
बड़े प्यार से
मेरे ऑफिस से घर लौटते ही कहा था-
‘बहुत थके हुए लग रहे हैं आप
शायद ऑफिस में ज़्यादा काम रहा होगा
ठीक है……
आप जल्दी से फ्रेश हो जाइए
तब तक मैं चाय बना देती हूँ।’
चाय पीकर थकान मिटाना
ये तो दूर की बात थी।
असल बात तो यह है कि
थकान चाय से नहीं मिटती बन्धु!
थकान मिटती है प्रेम से।
-भाऊराव महंत
