थाम लिया जब हाथ तेरा,
दुनिया से क्या डरना,
तेरे संग ही जीना मुझको,
अब तेरे संग ही मरना।
तेरे साथ के लिए ही मैं ,
दुनिया से लड़कर आई ,
अब तेरी बारी है साजन,
मैंने अपनी प्रीत निभाई।
मुझे यकीन है तुम पर पूरा,
कभी आंच नहीं आने दोगे,
मुझ तक आने से पहले ही,
हर आफत का मुख मोड़ोगे।
हम तुम दोनो मिल कर के,
घर अपना नया बसाऐगें,
प्रेम से उसको सींच सींच कर,
गुलशन सा उसे महकाऐंगे।
विश्वास की नींव पे बना ये घर,
कभी गिरेगा नहीं गलतफहमी से,
कहे कोई कुछ भी कितना भी,
रूठेंगें न हम कभी इक दूजे से।
साथ हमारा सदा यूँ ही बना रहे,
मैं करूँ प्रर्थना नित ईश्वर से,
कदम कदम चलें साथ साथ हम,
साथ मिला है ये हमें किस्मत से।
-स्मृति गुप्ता
जबलपुर
