थाम लिया है जब हाथ तेरा
फिर क्यों है घबराएं तू।
जीवन पथ पर इस गाड़ी को
तालमेल से क्यों ना चलाएं हम।
राह में डर कभी तुम जाओ
तो साथ मैं निभा जाऊं।
चलते चलते जब मैं गिर जाऊं कभी
तब मुझे तुम संभाल जाओ।
जीवन की इस गाड़ी को
हंसते खेलते यूं चलाएं हम
थाम लिया है जब हाथ तेरा,
फिर क्यों घबराएं तू।
ना जाने इस डगर में,
पड़ाव कितने है आएंगे
हम तुम जब साथ है,
सारे पड़ाव पार कर जाएंगे।
हँसते खिलखिलाते रचा जाएंगे
मधुर स्मृतियां हर मानव के
मानस पटल पर तब ।
सत्कर्म करते करते जीवन जब हम बिताएंगे
छोड़ जाएंगे तब अपने पलों की निशानियां ।
आने वाली पीढ़ी जब
याद करें हमें भी,
ऐसा आदर्शमय जीवन
तब हम बना जाएंगे।
जब थाम लिया है हाथ तेरा
फिर क्यों घबराएं तू।
-विशाखा सिंघल
(दिल्ली)
