धर कोख में जो,
नवजीवन देती है
वह मां होती है !
आंचल अमृत सिंचन कर
क्षुधा को हर लेती है
वह मां होती है!
संतान की खातिर
काल से भिड़ लेती है
वह मां होती है!
कांटा लाल को लग जाए
आंखे उसकी रोती है
वह मां होती है!
निष्प्राण प्राण देह
लगा छाती से
तूफानों से बचाती है
वह मां होती है।
-कीर्ति प्रदीप वर्मा
