दुनिया को नई राह दिखाने की बात कर
मंज़िल पे अपने पाँव बढ़ाने की बात कर
अपने निवाले आज ग़रीबों में बाँट के
कुछ पुण्य ज़िन्दगी में कमाने की बात कर
अफसर भी तुझे जिसके पसीने ने बनाया
उस दूध का कुछ मोल चुकाने की बात कर
सुलगा न खुद को आज नफरतों की आँच में
घर घर में लगी आग बुझाने की बात कर
मजहब की लड़ाई तो बहुत हो चुकी इंसा
अब इस वतन पे जान लुटाने की बात कर
-दिनकर राव दिनकर
