देर-सबेर

पहला पग उस डग पर
जिस पर नियति ले जाने को उत्साहित
गहरी सांस भरकर रख दिया है।

अंधकार न रोक सके पग
न कर सके मेरी चाल को प्रभावित
जलाकर एक दिया रख दिया है।

चल पड़ा हूँ तो निश्चित है
देर-सबेर मंजिल भी होगी उद्वेलित
पग के नीचे मन भी रख दिया है॥

-ख़ुशी प्रयागराज

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