नया सूर्य उदय, नया सवेरा,
निकल उठा खुशियों का फ़ुवेरा,
चारों ओर हरियाली छाई,
इस नए दिन की हार्दिक बधाई,
इस सुहाने दिन नया काम करेंगे,
हम स्कूल चलेंगे, खूब पढ़ेंगे,
मस्ती करेंगे साथ मिलकर,
स्कूल चलेंगे साथ मिलकर,
कंधों पर हमारे किताबों से भरा बस्ता है,
हम साथ हैं तो आसान या रस्ता है,
भविष्य सवार ने हम स्कूल चलेंगे,
किताबों को दोस्त बनाकर हमेशा उनके साथ रहेंगे,
सूर्य निकला नीलांबर से धूप यह छा गई,
सर सराती हवाओं के संग ताजगी यह आ गई,
खेत-बाग से लगकर यह कुटिया शांत, सभ्य और निराली है,
इसमें हर दिन होली और हर शाम दिवाली है,
सुबह की बेला से मंत्रमुक्त होकर,
रात को तारों के नीचे सोकर,
हम आज स्कूल चलेंगे,
खूब पढ़ेंगे, खूब खेलेंगे,
अपना भविष्य बनाएंगे,
हम अपना कर्तव्य निभाएंगे।
-प्रणव राज
कैमूर (बिहार)
