नारी माँ है भगवान का अवतार है
मेरी खुशियों का वही आधार है
नारी मन कोमल नारी से संसार है
नारी बिन कुछ नही सब निराधार है
नारी मित्र,अर्धांगिनी,नारी के उपकार है
नारी सौंदर्य का रूप,नारी मददगार है
नारी शौर्य का रूप,नारी वफादार है
नारी से ही जीत है,कभी भी ना हार है
नारी में स्वाभिमान, नारी खुद्दार है
नारी पे अभिमान,नारी से घरबार है
नारी जीत की राह,नारी असरदार है
नारी से सम्भव,सपने सभी साकार है
-किशोर छिपेश्वर “सागर”
बालाघाट
