जब हम छोटे बच्चे थे
नित पाठशाला जाते थे
सुबह सवेरे नहा धोकर
सुंदर बाल बनवाते थे
मैया स्वादिष्ट टिफिन बनाती
कंधे पर बस्ता टंगवाते थे
प्यार से टीचर पाठ पढ़ाते
कान भी कभी पकड़वाते थे
खेलकूद और पढ़ लिखकर
फिर वापस घर को आते थे
नहीं जानते थे एक दिन
ऐसी पाठशाला जाएंगे
सारी दुनिया टीचर होगी
हम फिर बच्चे बन जाएंगे
हर गलती पर सजा मिलेगी
ना मैया दुलराएगी
खुद ही रोना खुद ही हंसना
खुद ही चलते जायेंगे….।
-अनुपमा शर्मा
रुड़की
