अज़ीज़ भी वो है, नसीब भी वो है,
दुनिया की भीड़ में सबसे करीब भी वो है,
उनकी दुआ से चलती है ज़िन्दगी,
क्योंकि ईश्वर भी वो है, और तक़दीर भी वो है।
जीवन में है सारे रिश्ते-नाते का प्यार।
उन सबसे ऊपर है पिता का प्यार॥
पिता से ही जीवन हरा-भरा लहराता है।
पिता ही सुरक्षा का कवच होता है॥
पिता ही परिवार की नींव है,
पिता का प्यार शब्दों से अलग होता है॥
लहजे में होती है कड़क डांट, शक्ति,
पर दिल हमेशा सरल, नरम होता है॥
उनकी डांट में भी अक्सर ज़िन्दगी का सार छिपा रहता है।
हो उनका हाथ सिर पर, तो हर ग़म भी मीलों दूर होता है॥
पिता रोटी है, कपड़ा है, मकान है।
पिता छोटे से परिंदे का बड़ा आसमान है॥
पिता है तो बच्चों के ढेर सारे सपने हैं।
पिता है तो बाज़ार के सब खिलौने अपने हैं॥
पिता अप्रदर्शित प्यार है।
पिता है तो बच्चों का इंतज़ार॥
पिता ही मां की बिंदी और सुहाग है।
पिता से ही मेरा साहस और सम्मान है॥
भूल सकता हूं एक दिन दुनिया सारी।
पर भूल ना पाऊं कभी मैं अपने पिता का प्यार॥
-शिवशंकर दुबे गंगेले
वारासिवनी, जिला बालाघाट
