आंगन में दिये से जलते,
घर में उजियारा लाते पिता।
हर अभिलाषा, हर इच्छा को
पूरा करते जाते पिता।
जिम्मेदारी लदी कंधों पर
होठों पर मुस्कान सजी,
बच्चों की खुशयों की खातिर
गरल भी हंस पी जाते पिता।
आँगन में दिये से जलते
घर में उजियारा लाते पिता।
खुशयों का हर पाठ पढ़ाते
जीवन की सच्चाई से।
नियमों का पालन करवाते
सख्ती और कड़ाई से।
परिवार को एक धुरी के
बंधन में रखते हैं पिता।
आँगन में दिये से जलते
घर में उजियारा लाते पिता।
अंतस गहरा सागर जैसा
दिल है गगन विशाल।
साया उनका बरगद जैसा
ज्यों शीतल ठंडी बयार।
माँ घर की दीवारें है तो
घर की छत होते हैं पिता।
आँगन में दिये से जलते
घर में उजियारा लाते पिता।
जीने का अंदाज निराला
अलग -अलग क़िरदारों में
उनके जैसा मिला न कोई
मुझको एक हजारों में।
बिना आपके जीवन लगता
जैसे काली रात पिता ।
आँगन में दिये से जलते
घर मे उजियारा लाते पिता।।
-कल्पना मिश्रा
