प्रतियोगिता और दोस्ती

राष्ट्र स्तर पर प्रतियोगिता का अंतिम चरण, और प्रतिद्वंदी कौन, खुद की सबसे पक्की सहेली, प्रिया और शालू दोनों ही बेहद परेशान,घर वालों की उम्मीद, दुनिया भर की नजरें उन पर थी।जीतने की खुशी से ज्यादा तनाव में थी दोनों,परन्तु एक बात बहुत अच्छी थी, दोनों की मित्रता पर कोई असर नहीं पड़ा, दोनों अपनी भावनाओं को एक दूसरे से बांँटती थी, तैयारी भी एक साथ करती थी। कुछ चार दिन पहले जब प्रतियोगिता की तारीख की घोषणा की गई, तो दोनों को बड़ी घबराहट होने लगी। दोनों जीतना चाहती थी, पर दूसरे को हारते देखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। दोनों कमरे में गुमसुम सोच में डूबी थी, तभी शालू की ताईजी उनके कमरे में उनके लिए नाश्ता लेकर आई, “क्या बात है,आज तुम्हारा बातों का पिटारा खाली हो गया क्या?” “ताईजी हमें बहुत डर लग रहा है।” प्रिया ने बुदबुदाते हुए कहा। ताईजी ने दोनों को अपने पास बुलाकर बैठाया और समझाने लगी,” अरे,इसमें डरने की क्या बात है, तुम्हे तो वही करना है, जो तुम दोनों को सबसे ज्यादा पसंद है, डांस ; इसमें किस बात का डर।” “पर हम दोनों में से जो हार गया वो।” शालू ने बात काटते हुए कहा।
“किसी एक की हार तो होगी, नहीं तो क्या, तुम दोनों को एक साथ फर्स्ट प्राइज चाहिए।” मजाकिया स्वर में ताई जी ने कहा।
फिर उन्होंने समझाया, देखो बेटा किसी भी प्रतियोगिता में प्रतिस्पर्धा की भावना ही आपको जीत दिलाती है, यह ध्यान रखना कि तुम एक दूसरे को हराने के लिए नहीं, खुद जीतने के लिए जा रही हो। जीत किसी की भी हो, खुशी तुम दोनों को होगी, इतना तो हम सब को पता है । बेटा प्रतिस्पर्धा की भावना बुरी नहीं होती ,यह एक गलत धारणा है ,बल्कि मैं तो यह कहूंगी ,कि इस भावना को हमेशा गले से लगा के रखो ,यह भावना तुम्हे हमेशा बेहतर बनाने में मदद करेगी,और सबसे अच्छी बात तो यह है ,कि तुम दोनों में से जो भी हारा ,उसे संभालने के लिए उसका सबसे प्यारा साथी उसके साथ होगा ,फिर डर कैसा?
अब उठो, एक दूसरे की हिम्मत बनो, और तैयारी में जुट जाओ। तुम दोनों को अपना शत प्रतिशत देना है,फिर परिणाम चाहे जो हो।” दोनों सहेलियों ने उनकी बात समझी,एक दूसरे की हिम्मत बनी, प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और एक दूसरे को कड़ी टक्कर दी। परिणाम यह हुआ कि निर्णायक समिति ने दोनों को विजेता घोषित कर दिया। तालियों की आवाज से पूरा प्रांगण गूंज उठा।
प्रिया और शालू ने एक दूसरे को गले लगा लिया,उन्हें आज अपनी दोस्ती पर गर्व हुआ कि उनकी दोस्ती ने उन्हें जीत दिलाई ,न कि यह प्रतियोगिता उनकी दोस्ती के बीच आई ।

-सोनम लड़ीवाला
जयपुर (राजस्थान)

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