प्रिय अंतर्मन,
नमस्कार
अंतर्मन को पत्र प्रथम बार लिख रही हूँ मुझे पत्र लिखना बहुत अच्छा लगता है पुराने जमाने में संदेश पत्र द्वारा सूचना का आदान-प्रदान का जरिया था अब तो ये चलन पूर्णतः बंद है
जब में फुर्सत होती हूँ तो अंतर्मन से बातें कर ही लेती हूँ
अपनी जिन्दगी में, मैं इतना नेक काम करूँ कि कभी मेरा लेखा जोखा कर्मो का खुले तो ऊपर वाला भी सोचे क्या सोच, क्या विचार, क्या कर्म, क्या व्यवहार है।
हमारे साथ किसी ने क्या किया उसे जाने दो, जो हम कर रहे वह देखे, अपने आस-पास ऐसे व्यक्ति भी रहे जो हमें हमारी गलती भी बताएं और अच्छाई भी बताएं हम अभी भी सभल सकते हैं।
मैं अदिति रुसिया का शुक्रिया
धन्यवाद कहूँगी जिन्होने मुझे अन्तरा_ शब्दशक्ति से जोड़ा में
अपने दिल व मन के अल्फाज आप सभी से शेयर करती हूँ।
जो भी मैं लिखती हूँ मुझे बहुत खूबसूरत प्लेटफार्म मिला अंतंर्मन की उद्धार लेखनी में झलक जाते हैं।
जीवन सुन्दर बनाता चल
सपने के फूल सजा चल
मन में ऐसा अहसास जगा
दुखियों को गले लगाता चल।।
-ऊषा नौगरहिया (ज्योति)
कटनी
