हंसते हुए चेहरों से, मुलाकात कीजिए,
दर्द हो दिल में, किसी से बात कीजिए।
भूल कर भी ना कभी, किसी के सामने,
आंखों से आँसुओं की, बरसात कीजिए।
जिन्दगी है तुम्हारी, फैसले भी तुम्ही लो,
खुद के भरोसे खुद की, हयात कीजिए।
तुमको राय देने वाले, सब तैयार बैठे है,
हर कदम से पहले, एहतियात कीजिए।
कुछ फैसलों से फासले, बढ़ते हैं ‘समन्दर’,
दिल को ना शतरंज की बिसात कीजिए।
-गोपेश दशोरा ‘समन्दर’
उदयपुर (राजस्थान)
