छोटी-छोटी बातों पे उत्पात मचाया न करो।
बात- बेबात में यूँ बात बढ़ाया न करो।
खुद की गलती को सदा औरों के सिर क्यों मढ़ते हो?
गलतियां सबसे ही होती हैं, मान जाया करो।
तेरी हर भूल सदा माफ करते आए हैं,
फिर भी क्यों रूठ के जाते हो, जाया न करो।
दिल लगाना कोई दिल्लगी नहीं है सनम,
दिल की लगी को, और लगाया न करो।
बात- बेबात में यूँ बात बढ़ाया न करो
छोटी-छोटी बातों पे उत्पात मचाया न करो।
-राधा गोयल,
विकासपुरी (दिल्ली)
