भारत में योग का विकास

भारत में योग की परंपरा बहुत प्राचीन है ।ऐसा माना जाता है कि सब धर्मों की उत्पत्ति से पहले भारत धरा पर योग विद्यमान था। भगवान शिव को योग का प्रणेता माना गया है, इसलिए उन्हें आदि योगी के नाम से भी जाना जाता है। कहते हैं ,भगवान शिव ने अपने सात शिष्यों को योग की शिक्षा दी, फिर वह सब अलग-अलग दिशाओं में योग का प्रचार करने निकल गए।
योग शब्द संस्कृत के युज धातु से बना है, जिसका अर्थ है जोड़ना अर्थात मन की चेतना को ब्रह्मांडीय चेतना से जोड़ना। योग का सबसे पहले लिखित उल्लेख 1500 ईसा पूर्व ऋग्वेद में मिलता है । इसमें मन पर नियंत्रण करके मंत्रों द्वारा ईश्वर को प्राप्त करने को योग की संज्ञा दी गई।
वैदिक काल में योग का अर्थ था यज्ञ और साधना। इसे मोक्ष प्राप्ति के साधन के रूप में माना गया। इसके उपरांत 900 ईसा पूर्व अथर्ववेद में श्वास नियंत्रण अर्थात प्राणायाम का उल्लेख मिलता है, इसमें शरीर के आठ चक्रों और प्राण ऊर्जा के विषय में विस्तार से वर्णन मिलता है।इसे ईश्वर प्राप्ति के लिए ध्यान से जोड़ा गया।
इसके बाद बौद्ध और जैन धर्म में भी योग को विस्तार दिया गया ।जहां बौद्ध साहित्य में योगासनों पर बल दिया गया वहीं जैन धर्म में योग को मुक्ति और मोक्ष के साधन के रूप में देखा गया ।
भगवान कृष्ण ने भी गीता के माध्यम से कर्म ,ज्ञान और भक्ति योग का उपदेश दिया। इस अवधारणा में सत कर्मों पर काफी बल दिया गया है।योग का इतिहास दर्शन, आध्यात्मिकता और स्वास्थ्य का सम्मिश्रण है ।
आधुनिक योग के जनक महर्षि पतंजलि को माना जाता है। इन्होंने योग दर्शन को मुख्य दर्शन के रूप में प्रस्तुत किया, इन्होंने लगभग 200 ईसा पूर्व योग सूत्र का संकलन किया जिसमें योग को विज्ञान के साथ समाहित किया गया। इसके बाद 19वीं और 20वीं सदी में स्वामी विवेकानंद और रामानुजाचार्य आदि संतों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग को लोगों को परिचित करवाया, लेकिन आज योग को जहां तन के स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जाता है वही मन के स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक माना जाता है ।आज इस तनाव भरे वातावरण में यह आवश्यक भी है कि तन और मन दोनों स्वस्थ रहें, जिससे एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके और योग उसमें भली-भांति अपनी भूमिका निभा रहा है। आज पूरा विश्व योग के महत्व को स्वीकार कर रहा है,इसी का परिणाम है कि 21 जून को संयुक्त राष्ट्र द्वारा योग दिवस के रूप में घोषित किया गया है।

-अनुपमा शर्मा
रुड़की

एक उत्तर छोड़ें

अन्तरा शब्दशक्ति – हिन्दी साहित्य, प्रकाशन और रचनाकारों के सशक्तिकरण का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच।
संपर्क करें
antrashabdshakti @gmail.com
Call- 9009423393
WhatsApp-9009465259
antrashabtshakti.com

Copyright © 2026 Antra Shabd Shakti. All Rights Reserved. Powered by WebCoodee

0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x