भावनाएँ शब्दों की मोहताज नहीं होतीं,
वे तो आँखों से भी बात किया करती हैं।
मौन की गहराइयों में उतरकर,
मन की हर धड़कन को पढ़ लिया करती हैं।
भावनाएं शब्दों की मोहताज़ नहीं होती
माँ का आँचल कुछ कहता कब है,
फिर भी सारा स्नेह बिखेर देता है।
पिता का मौन त्याग अनकहा ही,
जीवन भर संबल बन रहता है।
भावनाएं शब्दों की मोहताज़ नहीं होती
शब्द कभी-कभी साथ छोड़ देते,
अर्थ भी अपना रूप बदल लेते हैं।
पर सच्चे मन के निर्मल भाव,
हर हृदय तक स्वयं पहुँच जाते हैं।
भावनाएं शब्दों की मोहताज़ नहीं होती
रिश्तों की डोर शब्दों से नहीं,
विश्वास के धागों से बंधती है।
जहाँ अपनापन सच्चा होता है,
वहाँ हर ख़ामोशी भी बोलती है।
भावनाएं शब्दों की मोहताज़ नहीं होती।
वे हृदय से हृदय तक पहुँचने का
ईश्वर का सबसे सुंदर माध्यम होती हैं।
-डॉ संगीता बिंदल
पुणे
