भावों की गहराई

शब्दों की लंबाई नहीं, भावों की गहराई मन को छूती है।
कुछ बातें बहुत छोटी होती हैं, पर हृदय में उम्र भर गूंजती हैं।
प्रेम, अपनापन, सम्मान और संवेदना इनका मूल्य शब्दों की संख्या से नहीं, उनकी सच्चाई से आँका जाता है।
तभी तो शब्दों से नहीं उनके भावों से अपनों के हृदय में झांका जाता है।
जहां शब्द मुखर होकर भाव से सरगम बन जाते हैं।
वहीं एक मुस्कान, मौन का एक पल मन के घावों पर मरहम बन जाते हैं।

-रीति झा

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