आज तुम नहीं साथ मेरे,
पर फिर भी तेरा अहसास तो है,
लडखडाते हैं आज भी जब कदम
मेरे,
तेरे थामते हाथों का अहसास
आज भी है,
बहते हैं जब भी ग़मों में आंसू मेरे, तेरे नाज़ुक अँगुलियों से आंसू पोंछने का अहसास,
मेरे गालों पर आज भी है,डर जाता हूँ
जब किसी भयावह सपने से,
तेरे आँचल मैं छुप जाने का अहसास,
आज भी है,
करता नहीं अब गलतियाँ कोई,
गालों पर तेरे चांटों का अहसास
आज भी है,
आज जब तुम नहीं साथ मेरे ए मां मेरी,
पर दौड़ रही हो रग़ -रग़ में मेरी
तेरा सिर्फ जिस्म नहीं साथ मेरे,
मेरे रगों में दौड़ रहा लहू तेरा है,
मेरी तो हर सांस में समाई हो तुम,
कैसे सोचूं के तुम अब नहीं इस जग
में,
मेरी तो हर चीज़ में समाई हो तुम,
मेरी माँ, मेरी माँ, मेरी प्यारी माँ !!
-सुधीर “धीर”
