ममता करुणा
दया प्रेम को
त्याग समर्पण
कुशल क्षेम को
जिसकी हरदम हां है
धरा गगन में
सकल भुवन में
मां सा कोई
कहां चमन में
मां सी तो बस मां है !!!
मां है तो है
सूर्य भोर का
मां है तो है लाली
मां है तो है
संध्या प्यारी
दीपक तुलसी वाली
मां मंत्रों का
जाप निरंतर
आशीषी
आलाप निरंतर
मां पावन काया है
मां सा कोई
कहां चमन में
मां सी तो बस मां है !!!
मां है तो है
चोटें हल्की
तन की या फिर मन की
सिसकी हिचकी
को वश करती
मां की मीठी थपकी
फूंक मार के
पीर हरे जो
नयन नीर को
धरे परे जो
मां सच्ची ओझा है
मां सा कोई
कहां चमन में
मां सी तो बस मां है !!!
मां है तो सब
व्यंजन अपने
मां है तो चटखारें
मां है तो ये
भूख प्यास सब
पल में माने हारें
भूले से भी
छू दे जिसको
लज्जत वाला
कर दे उसको
मां जादू टोना है
मां सा कोई
कहां चमन में
मां सी तो बस मां है !!!
मां तो जाने
राम कृष्ण को
मां जाने शंकर को
सरस्वती
लछमी जाने वो
काली प्रलयंकर को
जिसको जैसा
रूप चाहिए
छाया या फिर
धूप चाहिए
वह सबकी दाता है
मां सा कोई
कहां चमन में
मां सी तो बस मां है !!!
मां है तो है
हँसी अधर पर
मां है तो मुस्कानें
मां है तो है
अपनी सारी
स्वर्ण रजत की खानें
मां की बाहें
मां का आंचल
मां की छाती
मां का काजल
मां मजबूत किला है
मां सा कोई
कहां चमन में
मां सी तो बस मां है !!!
मां है तो हैं
साँसें अपनी
मां से है संसार
मां से वाणी
दृश्य दृष्टि है
मां का सब उपकार
मां के आओ
चरण गहें हम
मां की आओ
शरण गहें हम
मां हम सब की जाँ है
मां सा कोई
कहां चमन में
मां सी तो बस मां है !!!
-आलोकेश्वर चबडाल
गिनती गांव, कोटाबाग (उत्तराखंड)
