मेरा प्रिय रचनाकार कवि या लेखक

कैसे सोचा आपने, एक ही होगा?

अपने समय से लेकर आज तक,

होता आई हूं हैरान देख कर,

इतने लेखकों, और कवियों का ज्ञान

शब्दों के मोती कुछ यूं उभर आते हैं,

जल्दी ही हम उनकी माला बनी पाते हैं,

कालजयी रचनाएं तो हमे,

प्राचीन कवि और लेखक ही बताते थे,

जिनको हम आज भी प्रासंगिक ही पाते हैं,

वृंदावन लाल वर्मा हों या

आचार्य चतुरसेन, ’वैशाली की नगरवधू ’

क्या आसानी से भूल पाते हैं?

प्रेमचंद, सूर, कबीर, तुलसी, जायसी,

सब के सब, अलग – अलग विधाओं में,

पारंगत नज़र आते हैं,

थोड़ा और आगे आइए,

न धर्मवीर भारती को भूल जाइए,

गुनाहों का देवता क्या आसानी से,

भुला देने की चीज है?

शिवानी, ममता कालिया, सूर्यबाला,

मालती जोशी जैसी असंख्य रचनाकार,

जो हमारे दिलों में समाई हैं,

सोचती जा रही हूं,

नाम ही नाम उभर कर आ रहे हैं,

के. पी. सक्सेना, शौकत थानवी,

जेहन में सर उठा रहे हैं,

इनकी रचनाओं में झलक जाता है,

इनका परिश्रम,

नहीं थे आज की भांति, अभिव्यक्ति के मंच,

शरत चंद्र, महादेवी वर्मा भी,

दिमाग में सर उठा रहे हैं,

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय का,

प्रति प्रश्न मुझे भूल गई क्या?

शत – शत नमन ऐसे रचनाकारों को,

विषयों का वैविध्य जिन्होंने हमें सिखाया,

धार्मिक रुचि वालों को,

रामायण और गीता का ज्ञान भाया,

तुलसी और वाल्मीकि ने अपनी जगह बनाया,

आज लोग कालजयी नहीं,

समकालीन वास्तविकता लिख रहे हैं,

थोड़ा – थोड़ा, ये भी तो मन में घर कर रहे हैं,

स्तब्ध हूं, इनके कलम के कौशल को देख कर,

मंच पाकर ये भी लाखों में निकल रहे हैं,

अब तो आप समझ ही गए होंगे,

कितना कठिन है किसी एक को,

पसंदीदा कह पाना,

सैकड़ों ने कब्ज़ा किया है दिल पर,

मुश्किल है एक को बताना।

-रश्मि सहाय सिन्हा
ग्रेटर नोएडा

एक उत्तर छोड़ें

अन्तरा शब्दशक्ति – हिन्दी साहित्य, प्रकाशन और रचनाकारों के सशक्तिकरण का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच।
संपर्क करें
antrashabdshakti @gmail.com
Call- 9009423393
WhatsApp-9009465259
antrashabtshakti.com

Copyright © 2026 Antra Shabd Shakti. All Rights Reserved. Powered by WebCoodee