मेरे मन

असीम स्नेह…
आज एक लंबे अंतराल के बाद खुद का खुद से मिलन हुआ; लगा कि अब कुछ समय अपने लिए निकालना बहुत जरूरी है। आज मन हुआ कि क्यों न खुद से ही खुद की बातें करूँ। जिंदगी की आपधापी में समय कैसे गुजर जाता है, पता ही नहीं चलता।
आज उम्र के इस पड़ाव पर लगता है कि सच में कभी खुद अपने मन से भी बातें करना चाहिए। कुछ अपनी कहना चाहिए, कुछ मन की सुनना चाहिए। कभी-कभी बहुत नाराज हो जाती हूं अपने से; कि क्यों इतनी जल्दी सबके सामने हार मान लेती हूं। बस जो किसी ने कुछ कहा तो चुपचाप मान लिया, क्योंकि बेकार की बहस और तर्क वितर्क में अपना दिमाग और समय जाया नहीं करना चाहती। किंतु इसे लोगों ने मेरी कमजोरी समझ लिया। अब सोचती हूं की बहुत हुआ किसी की भी गलत बातों को गलत कहने की हिम्मत करना होगी और शायद इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरत तुम्हारी ही होगी। चलो अब और बातें बाद में;..
तुम्हारी अपनी ही
साधना

-साधना छिरोल्या

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