आज श्रमिक दिवस पर….
हाँ मै श्रमिक हूँ
घर से बेघर हूँ
रूह से आजाद पर
अपने काम मे खुश हूँ…
माना …
खाते मे नही आती
मेरे छुट्टियाँ
इसलिए शायद
मनाता नही मै छुट्टियाँ
इंतजार मे रहती
मेरी कई चिट्ठियाँ
पसीने से तर बतर
दिन मेरे
थक के चुर रहती रातें मेरी
स्वप्न मे जिन्दा मेरे ख्वाब
अक्सर तन्हा मेरे ख्याल
बेबस मै और मेरा परिवार
दिवाली होली बस थोडा आराम
इसलिए शायद मेरा श्रमिक नाम…
रोज सुबह शाम भगा दौड़ी
मेहनत से चलती मेरी गाडी
सुबह शाम बस काम ही काम
इसलिए शायद मेरा श्रमिक नाम….स्वरा
-सुरेखा अग्रवाल
