मैं कम में जीता हूँ
कम शब्दों में,
कम लोगों में,
कम इच्छाओं में।
भीड़ से भरे इस संसार में
मैंने अपने भीतर
एक शांत कोना बचा रखा है,
जहाँ दिखावे की कोई जगह नहीं,
और अपेक्षाओं का कोई शोर नहीं।
मैंने सीखा है
कि हर चमक सुकून नहीं देती,
और हर उपलब्धि
मन को अमीर नहीं बनाती।
इसलिए अब
मैं कम चाहता हूँ,
कम कहता हूँ,
कम खोता हूँ।
क्योंकि मेरी सबसे बड़ी संपत्ति
न धन है, न प्रसिद्धि—
मेरी सबसे बड़ी संपत्ति
मेरे मन की शांति है,
जिसे पाने में
पूरी उम्र लग जाती है।
-राहुल आर्यन
